होम्योपैथिक स्ट्रोक उपचार के लिए एक मार्गदर्शिका: रिपर्टरी विश्लेषण और उपचार संकेत
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विवरण
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होम्योपैथिक स्ट्रोक उपचार: प्राथमिक उपचार, लक्षण और निर्णय वृक्ष
इस गाइड में विशिष्ट लक्षणों, रिपर्टरी ग्रेड और तीव्र बनाम रिकवरी संकेतों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
प्राथमिक स्ट्रोक उपचारों की मटेरिया मेडिका
1. एकॉन (एकोनिटम नेपेलस)
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चरण: अत्यंत प्रारंभिक/तीव्र अवस्था (घटना के तुरंत बाद)।
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मुख्य लक्षण:
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अचानक शुरू होने वाले लक्षण, अक्सर भय, सदमा या ठंडी, शुष्क हवा के संपर्क में आने से उत्पन्न होते हैं।
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तेज और धड़कती नाड़ी के साथ उच्च रक्तचाप।
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मानसिक स्थिति: मृत्यु का तीव्र भय; अत्यधिक चिंता और बेचैनी।
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शारीरिक लक्षण: पक्षाघात पूरी तरह से शुरू होने से पहले प्रभावित हिस्सों (हाथ/पैर) में सुन्नपन और झुनझुनी (झुनझुनी) होना।
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2. एनाकार्डियम ओरिएंटेल (ANAC)
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चरण: दुष्प्रभाव (परिणाम) या मानसिक गिरावट।
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मुख्य लक्षण:
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मानसिक स्थिति: स्ट्रोक के बाद स्मृति का गंभीर नुकसान। रोगी को ऐसा महसूस हो सकता है कि उसके अंदर "दो इच्छाएँ" (आंतरिक संघर्ष) चल रही हैं।
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शारीरिक: शरीर के अंगों के चारों ओर "घेरा" या "पट्टी" होने का अहसास।
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उपचार विधियाँ: भोजन करते समय अक्सर लक्षणों में आराम मिलता है।
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3. एआरएन (अर्निका मोंटाना)
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चरण: तीव्र (आघात/रक्तस्राव) और पुनर्प्राप्ति।
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मुख्य लक्षण:
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रक्तस्रावी स्ट्रोक (रक्त वाहिकाओं के फटने) के लिए विशिष्ट उपचार ।
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पूरे शरीर में दर्द और चोट लगने जैसा एहसास।
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मानसिक स्थिति: रोगी प्रश्नों का सही उत्तर देता है लेकिन फिर बेहोशी की हालत में चला जाता है; बीमार होने के बावजूद कहता है, "मुझे कुछ भी नहीं हुआ है।"
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शारीरिक लक्षण: बेहोशी की अवस्था में अनैच्छिक रूप से मल-मूत्र का निकलना। सिर गर्म और शरीर ठंडा महसूस होना।
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4. बार-सी. (बैरिटा कार्बोनिका)
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चरण: दीर्घकालिक/वृद्धावस्था (रोकथाम या परिणाम)।
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मुख्य लक्षण:
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समय से पहले वृद्धावस्था या मनोभ्रंश से ग्रस्त बुजुर्गों में स्ट्रोक के मामलों में यह दवा उपयुक्त है।
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शारीरिक लक्षण: जीभ का पक्षाघात (निगलने में कठिनाई, अस्पष्ट वाणी)।
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मानसिक स्थिति: बचकाना व्यवहार; स्मृति हानि; भ्रम।
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शारीरिक लक्षण: पैरों में घबराहट; शरीर और मन की सामान्य कमजोरी।
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5. बेल (बेलाडोना)
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चरण: तीव्र कंजेस्टिव चरण।
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मुख्य लक्षण:
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लक्षण: चेहरा लाल और गर्म; गर्दन की कैरोटिड धमनियों में तेज धड़कन; पुतलियों का फैलना; आंखों में उग्र भाव।
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शुरुआत: अचानक और हिंसक।
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शारीरिक लक्षण: मांसपेशियों में फड़कन, झटके या ऐंठन। दाहिनी ओर का पक्षाघात (हेमिप्लेजिया) आम है।
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स्थिति का प्रकार: झटके, प्रकाश या शोर से बिगड़ना।
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6. ब्रायोनिया अल्बा (BRY)
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चरण: तीव्र या उप-तीव्र।
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मुख्य लक्षण:
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स्थिति का प्रकार: थोड़ी सी भी हलचल से स्थिति और बिगड़ जाती है। मरीज बिल्कुल स्थिर लेटना चाहता है।
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मानसिक स्थिति: चिड़चिड़ा; बेहोशी की हालत में भी व्यापारिक मामलों के बारे में बात करता है।
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शारीरिक लक्षण: मुंह सूखना; अत्यधिक प्यास लगना। सिर में जकड़न और तेज सिरदर्द।
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7. कॉस्टिकम (Causticum)
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चरण: दीर्घकालिक पक्षाघात/पुनर्वास।
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मुख्य लक्षण:
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पक्ष: अक्सर दाहिनी ओर के पक्षाघात के लिए संकेतित।
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शारीरिक लक्षण: टेंडनों का सिकुड़ना (अंगों का ऊपर की ओर मुड़ जाना)। शरीर के किसी एक अंग का पक्षाघात (जैसे, स्वर रज्जु के कारण आवाज का न बैठना/स्वरहीनता, पलकों के कारण पलकों का झुक जाना)।
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रोग का प्रकार: साफ और शुष्क मौसम में स्थिति बिगड़ती है; नम/गीले मौसम में स्थिति बेहतर होती है।
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8. कोकुलस इंडिकस (Cocculus Indicus)
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चरण: चक्कर आना/स्ट्रोक से पहले की स्थिति या उससे संबंधित पक्षाघात।
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मुख्य लक्षण:
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शुरुआत: स्ट्रोक से पहले गंभीर चक्कर आना और मतली होना।
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शारीरिक लक्षण: गर्दन की मांसपेशियों में अत्यधिक कमजोरी (सिर इतना भारी लगता है कि उसे संभालना मुश्किल होता है)। निचले अंगों का पक्षाघात।
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कारण: अक्सर नींद की कमी या प्रियजनों की देखभाल करने (देखभालकर्ता की थकान) के कारण होता है।
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9. जैल (जेलसेमियम)
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चरण: शुरुआत या पक्षाघात संबंधी कमजोरी।
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मुख्य लक्षण:
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शारीरिक लक्षण: पलकों का भारीपन (झुकना); अंगों का भारीपन; कंपकंपी और झटके।
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मानसिक स्थिति: सुस्ती, चक्कर आना और उनींदापन ("3 डी")।
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उच्चारण: भारी और कर्कश आवाज; जीभ मुंह के लिए बहुत मोटी महसूस होती है।
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स्थिति: प्यास का न लगना।
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10. ग्लॉन. (ग्लोनोइनम)
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चरण: अत्यधिक तीव्र रक्त जमाव (उच्च रक्तचाप का संकट)।
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मुख्य लक्षण:
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अनुभूति: सिर फटने जैसा तेज दर्द; ऐसा महसूस होता है जैसे सिर फट जाएगा।
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शारीरिक लक्षण: गर्दन और सिर की धमनियों में स्पष्ट रूप से धड़कन महसूस होना।
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लक्षण: सिर के आसपास किसी भी प्रकार की गर्मी सहन नहीं कर सकता; धूप से स्थिति और बिगड़ जाती है।
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बेलाडोना से अंतर: बेलाडोना की निरंतर गर्मी की तुलना में ग्लोनोइनम में रक्त का प्रवाह अधिक तीव्र (अनियमित) होता है।
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11. हाइड्र-एसी। (हाइड्रोसायनिक एसिड)
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चरण: अचानक पतन ("बिजली का झटका")।
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मुख्य लक्षण:
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शुरुआत: अचानक, हिंसक रूप से गिर जाना। मरीज चीखते हुए गिर जाता है।
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शारीरिक लक्षण: सायनोसिस (त्वचा का नीला पड़ना); ठंड लगना; लंबे समय तक बेहोशी के दौरे पड़ना।
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श्वसन: हांफते हुए, अनियमित सांस लेना (चेन-स्टोक्स श्वसन)।
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संकेत: जब स्ट्रोक से तत्काल हृदय/श्वसन विफलता का खतरा हो।
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12. आईपी. (इपेकाकुआन्हा)
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चरण: मतली के साथ ऐंठनयुक्त या रक्तस्रावी।
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मुख्य लक्षण:
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मुख्य लक्षण: लगातार और निरंतर मतली जो उल्टी करने से भी ठीक नहीं होती।
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शारीरिक लक्षण: स्ट्रोक के साथ सांस लेने में कठिनाई (घुटन भरी घरघराहट)। चमकीला लाल रक्तस्राव (यदि रक्तस्रावी स्ट्रोक हो)।
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13. लाच. (लाचेसिस म्यूटस)
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चरण: तीव्र या दीर्घकालिक।
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मुख्य लक्षण:
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पक्ष: अक्सर बाईं ओर के पक्षाघात के लिए संकेतित।
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प्रकार: नींद के बाद स्थिति और बिगड़ जाती है (जागने पर भी स्थिति और खराब हो जाती है)।
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शारीरिक: गर्दन या कमर के आसपास तंग कपड़ों के प्रति असहिष्णुता।
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वाक्: वाचाघात (सही शब्द न मिल पाना) या वाचालता (अत्यधिक और तेजी से बोलना)।
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14. एनयूएक्स-वी. (नक्स वोमिका)
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चरण: पुनर्प्राप्ति/पुनर्वास (या उच्च तनाव वाले प्रकारों में रोकथाम)।
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मुख्य लक्षण:
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संविधान: "टाइप ए" कार्यकारी - निष्क्रिय, तनावग्रस्त, चिड़चिड़ा, कॉफी/शराब/मसालेदार भोजन का अत्यधिक सेवन करने वाला।
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शारीरिक लक्षण: पूर्ण पक्षाघात के बजाय आंशिक पक्षाघात (अपूर्ण पक्षाघात)। पैरों का घिसटना।
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लक्षण: ठंड लगना; ठंडी हवा में स्थिति और बिगड़ जाती है।
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15. ओपियम (Opium)
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चरण: गहरी बेहोशी/बेहोशी।
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मुख्य लक्षण:
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रूप-रंग: चेहरा गहरा लाल, फूला हुआ और गर्म है।
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श्वसन: घरघराहट वाली सांस लेना (तेज खर्राटे/सांस लेने में घरघराहट) और सांस छोड़ते समय गालों का फूलना।
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मानसिक अवस्था: अचेतन; जगाया नहीं जा सकता। सभी कष्टों से मुक्त।
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शारीरिक हावभाव: मुंह खुला रह गया; आंखें आधी खुली हुई थीं।
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16. पीएलबी (प्लंबम मेटैलिकम)
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चरण: क्रोनिक स्क्लेरोसिस/एट्रोफी।
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मुख्य लक्षण:
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शारीरिक लक्षण: लकवाग्रस्त हिस्सों में मांसपेशियों का धीरे-धीरे क्षय होना (मांसपेशियों का कमजोर पड़ना)।
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विशिष्ट लक्षण: कलाई का लटकना; फ्लेक्सर की तुलना में एक्सटेंसर अधिक प्रभावित होते हैं।
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संबंधित लक्षण: पुरानी कब्ज; मसूड़ों पर नीली रेखा (सीसा रेखा)।
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सही दवा और उसकी क्षमता का चयन कैसे करें?
सर्वोत्तम परिणामों के लिए, एक ऐसी होम्योपैथिक दवा चुनें जो आपके लक्षणों से काफी मिलती-जुलती हो या अपने डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
सुझाई गई क्षमताएँ:
✔ हल्के लक्षण या बच्चे – 6C
✔ तीव्र परिस्थितियाँ – 30°C या 200°C
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एक पेशेवर होम्योपैथ सुरक्षित और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है।
| गुण | विवरण |
|---|---|
| आकार / प्रस्तुति | 30 मिलीलीटर की सीलबंद बोतलें |
| उत्पादक | होमियोमार्ट / एसबीएल / श्वाबे / सिमिला (कोई भी) |
| रूप | ड्रॉप |
| विकल्प भार | 75 ग्राम (इकाई भार) |
| शक्ति | 30 डिग्री सेल्सियस – 1 महीना |
| लक्ष्य ग्राहक | स्ट्रोक के मरीज़ / स्ट्रोक के बाद रिकवरी / न्यूरोलॉजिकल सहायता |
| स्रोत | होम्योपैथिक रिपर्टरी (डॉ. रॉबिन मर्फी द्वारा लिखित लोटस मटेरिया मेडिका) |
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कार्यकारी सारांश
नीचे एक संरचित निर्णय वृक्ष दिया गया है जो स्ट्रोक/एपोप्लेक्सी के प्राथमिक उपचारों में अंतर करने में मदद करता है। यह ढांचा चयन प्रक्रिया को दो प्रमुख चरणों में विभाजित करता है: तीव्र चरण (प्रारंभ/संकट) और रिकवरी/दीर्घकालिक चरण (पक्षाघात/पुनर्वास) ।
1. तीव्र चरण: शुरुआत और संकट
स्ट्रोक होने के दौरान या घटना के तुरंत बाद इसका प्रयोग करें।
ए. क्या अत्यधिक रक्त जमाव (चेहरा लाल होना, रक्तचाप अधिक होना, गर्मी लगना) है?
क्या सिर में इतना खून बह रहा है कि ऐसा लग रहा है जैसे वह फट जाएगा?
ग्लोनोइनम: गर्दन में स्पष्ट धड़कन; गर्मी सहन नहीं कर पाना; रक्त का अनियमित प्रवाह; "फटने" जैसी अनुभूति।
क्या चेहरा लाल, गर्म है, पुतलियाँ फैली हुई हैं और चेहरे पर तेज फड़कन हो रही है?
बेलाडोना: अचानक शुरुआत; धड़कती हुई कैरोटिड धमनियां; बार-बार दाहिनी ओर का पक्षाघात; उग्र रूप-रंग; झटके या शोर से स्थिति और बिगड़ जाती है।
बी. क्या व्यक्ति गहरी बेहोशी या कोमा में है?
क्या सांस लेने की आवाज तेज है, खर्राटे आते हैं (खर्राटे जैसी आवाज), और चेहरा गहरा लाल/सूजा हुआ है?
अफीम: उत्तेजित नहीं हो सकते; जबड़ा लटका हुआ; आंखें आधी खुली; दर्द रहित अवस्था; सांस छोड़ते समय गाल फूल जाते हैं।
क्या मरीज जागकर जवाब देता है, फिर वापस बेहोशी की हालत में चला जाता है?
आर्निका: कहता है "मुझे कोई परेशानी नहीं है"; बिस्तर बहुत सख्त लगता है; रक्तस्रावी स्ट्रोक के लिए प्रमुख दवा; अनैच्छिक मल या मूत्र।
सी. क्या सदमा, पतन या घबराहट है?
क्या मृत्यु का अत्यधिक भय और तीव्र चिंता है?
एकोनाइट: बहुत प्रारंभिक अवस्था का उपचार; झुनझुनी/सुन्नता; पूरी तरह से तेज नाड़ी; अक्सर सदमे या ठंडी हवा के संपर्क में आने से शुरू होता है।
क्या शरीर का रंग नीला पड़ गया है (सायनोसिस), ठंड लगना और सांस लेने में तकलीफ हो रही है?
हाइड्रोसायनिक एसिड: अचानक "बिजली की तरह" बेहोशी; अनियमित सांस लेना; हृदय गति रुकने का खतरा; ठंडी, चिपचिपी त्वचा।
2. पुनर्प्राप्ति चरण: पक्षाघात और उसके परिणाम
इसका उपयोग दीर्घकालिक पुनर्वास, पक्षाघात के मामलों और स्ट्रोक के बाद के प्रभावों के लिए किया जाता है।
ए. पक्षाघात के पक्ष के आधार पर अंतर करना
बाईं ओर का पक्षाघात
लैकेसिस: जागने के तुरंत बाद स्थिति और बिगड़ जाती है; तंग कॉलर बर्दाश्त नहीं कर पाता; अत्यधिक बोलना या अस्पष्ट भाषण (अफेसिया)।
दाहिनी ओर का पक्षाघात
कॉस्टिकम: नसें सिकुड़ी हुई महसूस होती हैं; संकुचन; स्वर रज्जु की कमजोरी (गला बैठना); शुष्क, साफ मौसम में स्थिति और बिगड़ जाती है।
*बेलाडोना भी दाहिनी ओर होता है लेकिन मुख्यतः तीव्र होता है।*
बी. मानसिक/शारीरिक अवस्था के आधार पर विभेद करना
सुस्ती, नींद आना और कंपकंपी महसूस होना?
गेल्सेमियम: भारी पलकें और भारी अंग; अस्पष्ट वाणी; प्यास न लगना; कंपकंपी के साथ कमजोरी।
बुढ़ापे के कारण कमजोर, बचकाना और भ्रमित?
बैरिटा कार्ब: समय से पहले वृद्धावस्था; जीभ का पक्षाघात; बचकाना व्यवहार; स्पष्ट मानसिक/शारीरिक कमजोरी।
चिड़चिड़ा, "टाइप ए" स्वभाव वाला, ऐंठनग्रस्त?
नक्स वोमिका: क्रोध, अधीरता; अपूर्ण पक्षाघात (पैर घसीटना); तनाव या उत्तेजक पदार्थों का इतिहास; ठंड के प्रति संवेदनशील।
स्मृति हानि और आंतरिक संघर्ष?
एनाकार्डियम: स्मृति में गंभीर कमजोरी; "दो इच्छाओं" की अनुभूति; शरीर के अंगों के आसपास पट्टी जैसी जकड़न; खाने के बाद बेहतर महसूस होना।
सी. मांसपेशी विकृति के आधार पर विभेदन
क्या मांसपेशियां क्षीण हो रही हैं (एट्रोफी)?
PLUMBUM MET: मांसपेशियों का धीरे-धीरे कमजोर होना; कलाई का लटकना; पुरानी कब्ज; मसूड़ों की नीली रेखा।
